रंध्र क्या है, रंध्र विज्ञान, ब्रह्मरंध्र, शिवरंध्र, विष्णुरंध्र, देवीरंध्र, शक्तिरंध्र, आज्ञारंध्र, त्रिनेत्ररंध्र, हृदयरंध्र, परारंध्र, निर्गुणयान, सगुणयान, ब्रह्मयान, देवयान, महायान, परायान

इस अध्याय में रंध्र क्या है, उसको पुरातन रंध्र विज्ञान के अनुसार बताया जाएगा I कई रंध्र होते हैं, जैसे ब्रह्मरंध्र, शिवरंध्र, विष्णुरंध्र, देवीरंध्र, शक्तिरंध्र, आज्ञारंध्र, त्रिनेत्ररंध्र, हृदयरंध्र, परारंध्र, और नाभिरंध्र I इस रंध्र विज्ञान के कई मार्ग रूपी अंग …

रंध्र क्या है, रंध्र विज्ञान, ब्रह्मरंध्र, शिवरंध्र, विष्णुरंध्र, देवीरंध्र, शक्तिरंध्र, आज्ञारंध्र, त्रिनेत्ररंध्र, हृदयरंध्र, परारंध्र, निर्गुणयान, सगुणयान, ब्रह्मयान, देवयान, महायान, परायान

इस अध्याय में रंध्र क्या है, उसको पुरातन रंध्र विज्ञान के अनुसार बताया जाएगा I कई रंध्र होते हैं, जैसे ब्रह्मरंध्र, शिवरंध्र, विष्णुरंध्र, देवीरंध्र, शक्तिरंध्र, आज्ञारंध्र, त्रिनेत्ररंध्र, हृदयरंध्र, परारंध्र, और नाभिरंध्र I इस रंध्र विज्ञान के कई मार्ग रूपी अंग (या यान) भी हैं, जैसे ब्रह्मयान, जिसमें निर्गुणयान या अद्वैतयान, ...

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सूक्ष्म शरीर क्या, सूक्ष्म शरीर के अंग, सूक्ष्म शरीर गमन, सूक्ष्म शरीर का लय, सूक्ष्म शरीर निर्माण, नील सरस्वती पुत्र, माँ गायत्री के नीले मुख का पुत्र, शिवानुजा पुत्र, अघोर पुत्र, रूह

इस भाग में सूक्ष्म शरीर क्या है, सूक्ष्म शरीर गमन क्या है, योगमार्ग से सूक्ष्म शरीर निर्माण कैसे होता है, इसपर बात होगी I इस अध्याय में, सूक्ष्म शरीर का लय स्थान और उसकी प्रक्रिया, और सूक्ष्म शरीर और अघोर …

सूक्ष्म शरीर क्या, सूक्ष्म शरीर के अंग, सूक्ष्म शरीर गमन, सूक्ष्म शरीर का लय, सूक्ष्म शरीर निर्माण, नील सरस्वती पुत्र, माँ गायत्री के नीले मुख का पुत्र, शिवानुजा पुत्र, अघोर पुत्र, रूह

इस भाग में सूक्ष्म शरीर क्या है, सूक्ष्म शरीर गमन क्या है, योगमार्ग से सूक्ष्म शरीर निर्माण कैसे होता है, इसपर बात होगी I इस अध्याय में, सूक्ष्म शरीर का लय स्थान और उसकी प्रक्रिया, और सूक्ष्म शरीर और अघोर का नाता, इसपर भी बात होगी I सूक्ष्म शरीर को ...

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अघोर ब्रह्म, गुरुपिता अहम्, अहम् नाद, अहंकार, सदाशिव का अघोर मुख, शिव का अघोर मुख, महादेव, अहम् ब्रह्मास्मि, अहम् अस्मि, नील सरस्वती, माँ गायत्री का नीला मुख

इस अध्याय में अघोर ब्रह्म, जिनका शब्द अहम् है, अर्थात अहम् शब्द या अहम् नाद है, उनकी बात होगी I पंच ब्रह्मोपनिषद् में यही अघोर नामक ब्रह्म कहलाया था I उस पञ्चब्रह्मोपनिषत् का ज्ञान भी मैंने ही एक पूर्व जन्म …

अघोर ब्रह्म, गुरुपिता अहम्, अहम् नाद, अहंकार, सदाशिव का अघोर मुख, शिव का अघोर मुख, महादेव, अहम् ब्रह्मास्मि, अहम् अस्मि, नील सरस्वती, माँ गायत्री का नीला मुख

इस अध्याय में अघोर ब्रह्म, जिनका शब्द अहम् है, अर्थात अहम् शब्द या अहम् नाद है, उनकी बात होगी I पंच ब्रह्मोपनिषद् में यही अघोर नामक ब्रह्म कहलाया था I उस पञ्चब्रह्मोपनिषत् का ज्ञान भी मैंने ही एक पूर्व जन्म में, मेरे उस समय के गुरुदेव, महादेव से लेकर दिया ...

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वामदेव ब्रह्म, फुह शब्द, सर्वसमता, शून्य तत्त्व, चार बुद्ध, यिन यांग, वामदेव सिद्ध शरीर, वामदेव शरीर, माँ गायत्री का धवला मुख, सामवेद, तत् त्वम् असि

इस अध्याय में वामदेव ब्रह्म पर बात होगी I पीठ चतुष्टय में, वामदेव नामक ब्रह्म का नाता पश्चिम आम्नाय, अर्थात द्वारका शारदा पीठ से है I वेद चतुष्टय में वामदेव का नाता, सामवेद से है, जिसका महावाक्य तत् त्वम् असि …

वामदेव ब्रह्म, फुह शब्द, सर्वसमता, शून्य तत्त्व, चार बुद्ध, यिन यांग, वामदेव सिद्ध शरीर, वामदेव शरीर, माँ गायत्री का धवला मुख, सामवेद, तत् त्वम् असि

इस अध्याय में वामदेव ब्रह्म पर बात होगी I पीठ चतुष्टय में, वामदेव नामक ब्रह्म का नाता पश्चिम आम्नाय, अर्थात द्वारका शारदा पीठ से है I वेद चतुष्टय में वामदेव का नाता, सामवेद से है, जिसका महावाक्य तत् त्वम् असि का है और जिसका नाता सगुण ब्रह्म से ही होता ...

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कृष्णपिङ्गल रुद्र, कृष्ण पिङ्गला रुद्र, कृष्ण पिङ्गल शरीर, नमः शिवाय शरीर, हंस शरीर, परमहंस शरीर, पिङ्गल शरीर, नटराज शरीर, रुद्र शरीर, उन्नचास पवन, अहम् से आला, अघोर से तत्पुरुष, अघोर से रुद्र देव

इस अध्याय में, अहम् नाद से आला नाद की बात होगी I यह अध्याय भी पञ्च ब्रह्म मार्ग के अंतर्गत ही है I इस अध्याय के मार्ग पर साधक पूर्व में बतलाए गए अघोर (या अहम् नाद) से वामदेव ब्रह्म …

कृष्णपिङ्गल रुद्र, कृष्ण पिङ्गला रुद्र, कृष्ण पिङ्गल शरीर, नमः शिवाय शरीर, हंस शरीर, परमहंस शरीर, पिङ्गल शरीर, नटराज शरीर, रुद्र शरीर, उन्नचास पवन, अहम् से आला, अघोर से तत्पुरुष, अघोर से रुद्र देव

इस अध्याय में, अहम् नाद से आला नाद की बात होगी I यह अध्याय भी पञ्च ब्रह्म मार्ग के अंतर्गत ही है I इस अध्याय के मार्ग पर साधक पूर्व में बतलाए गए अघोर (या अहम् नाद) से वामदेव ब्रह्म को जाता है, और वामदेव का साक्षात्कार करके तत्पुरुष ब्रह्म ...

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तत्पुरुष ब्रह्म, रुद्र देव, रुद्र, स्वयंभू, अस्मिता, अज, गुरुपिता आला, बुद्ध आला, आला नाद, अल्लाह, माँ गायत्री का रक्ता मुख, माँ गायत्री का विद्रुमा मुख, लाल तारा, रक्त चामुण्डा, भगवा रुद्र शरीर, भगवा सिद्ध शरीर, अयमात्मा ब्रह्म

इस अध्याय में तत्पुरुष ब्रह्म पर बात होगी, जिनका शब्द आला होता है और जिनको इस अध्याय में आला नाद (या आला का शब्द) भी कहा गया है I पञ्च ब्रह्म प्रदक्षिणा मार्ग में, तत्पुरुष नामक ब्रह्म का साक्षात्कार वामदेव …

तत्पुरुष ब्रह्म, रुद्र देव, रुद्र, स्वयंभू, अस्मिता, अज, गुरुपिता आला, बुद्ध आला, आला नाद, अल्लाह, माँ गायत्री का रक्ता मुख, माँ गायत्री का विद्रुमा मुख, लाल तारा, रक्त चामुण्डा, भगवा रुद्र शरीर, भगवा सिद्ध शरीर, अयमात्मा ब्रह्म

इस अध्याय में तत्पुरुष ब्रह्म पर बात होगी, जिनका शब्द आला होता है और जिनको इस अध्याय में आला नाद (या आला का शब्द) भी कहा गया है I पञ्च ब्रह्म प्रदक्षिणा मार्ग में, तत्पुरुष नामक ब्रह्म का साक्षात्कार वामदेव ब्रह्म के साक्षात्कार के पश्चात होता है I तिब्बती बौद्ध ...

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भू महाभूत, पृथ्वी महाभूत, उज्जयी श्वास, उज्जयी नाद, ब्रह्मा की श्वास, महाभूत पर विजय, महाभूत सिद्धि, महामानव, महाभूत और चक्रवर्त, योग चक्रवर्त, चक्रवर्ती सम्राट, ब्रह्माण्ड योग, ब्रह्माण्ड धारणा

यहाँ पर पृथ्वी महाभूत के साथ साथ, भू महाभूत के नाद, उज्जयी नाद और उज्जयी श्वास सहित, ब्रह्मा की श्वास, महाभूत पर विजय, महाभूत सिद्धि, महामानव, महाभूत और चक्रवर्त, योग चक्रवर्त, चक्रवर्ती सम्राट, त्रिभुवन सम्राट, ब्रह्माण्ड योग और ब्रह्माण्ड धारणा …

भू महाभूत, पृथ्वी महाभूत, उज्जयी श्वास, उज्जयी नाद, ब्रह्मा की श्वास, महाभूत पर विजय, महाभूत सिद्धि, महामानव, महाभूत और चक्रवर्त, योग चक्रवर्त, चक्रवर्ती सम्राट, ब्रह्माण्ड योग, ब्रह्माण्ड धारणा

यहाँ पर पृथ्वी महाभूत के साथ साथ, भू महाभूत के नाद, उज्जयी नाद और उज्जयी श्वास सहित, ब्रह्मा की श्वास, महाभूत पर विजय, महाभूत सिद्धि, महामानव, महाभूत और चक्रवर्त, योग चक्रवर्त, चक्रवर्ती सम्राट, त्रिभुवन सम्राट, ब्रह्माण्ड योग और ब्रह्माण्ड धारणा पर भी बात होगी I इस अध्याय में बताए गए ...

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सद्योजात ब्रह्म, इंद्रलोक, ब्रह्माण्डीय विज्ञानमय काया, हिरण्यगर्भ ब्रह्म, पुरुषार्थ चतुष्टय, धर्म अर्थ काम मोक्ष, ब्राह्मणत्व, माँ गायत्री का हेमा मुख, प्रज्ञानं ब्रह्म, ऋग्वेद

यहाँ पर सद्योजात ब्रह्म की बात होगी I यही सद्योजात नामक ब्रह्म को हिरण्यगर्भ ब्रह्म भी कहा जाता है I इन्ही सद्योजात को ब्रह्माण्ड की विजयानमय काया (अर्थात ब्रह्माण्डीय विज्ञानमय काया) भी कहा जा सकता है, और यही इंद्रलोक से …

सद्योजात ब्रह्म, इंद्रलोक, ब्रह्माण्डीय विज्ञानमय काया, हिरण्यगर्भ ब्रह्म, पुरुषार्थ चतुष्टय, धर्म अर्थ काम मोक्ष, ब्राह्मणत्व, माँ गायत्री का हेमा मुख, प्रज्ञानं ब्रह्म, ऋग्वेद

यहाँ पर सद्योजात ब्रह्म की बात होगी I यही सद्योजात नामक ब्रह्म को हिरण्यगर्भ ब्रह्म भी कहा जाता है I इन्ही सद्योजात को ब्रह्माण्ड की विजयानमय काया (अर्थात ब्रह्माण्डीय विज्ञानमय काया) भी कहा जा सकता है, और यही इंद्रलोक से भी संबंधित है I सद्योजात की दिव्यता माँ गायत्री का ...

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आकाश महाभूत, शब्द तन्मात्र, महाभूत सिद्धि, तन्मात्र सिद्धि, आकाश ब्रह्म, शब्द ब्रह्म, आकाश सिद्ध शरीर, ब्रह्माण्डातीत, ब्रह्म आयुर्वेद, ब्रह्माण्ड आयुर्वेद, चिकित्सा बुद्ध, नील मणि शरीर, नील रत्न शरीर

यहाँ पर आकाश महाभूत पर बात होगी जो ईशान ब्रह्म से संबंधित होता है I और यहाँ पर कई और बिंदुओं पर भी बात होगी जैसे शब्द महाभूत, तन्मात्र, महाभूत सिद्धि, तन्मात्र सिद्धि, आकाश ब्रह्म, शब्द ब्रह्म, आकाश सिद्ध शरीर, …

आकाश महाभूत, शब्द तन्मात्र, महाभूत सिद्धि, तन्मात्र सिद्धि, आकाश ब्रह्म, शब्द ब्रह्म, आकाश सिद्ध शरीर, ब्रह्माण्डातीत, ब्रह्म आयुर्वेद, ब्रह्माण्ड आयुर्वेद, चिकित्सा बुद्ध, नील मणि शरीर, नील रत्न शरीर

यहाँ पर आकाश महाभूत पर बात होगी जो ईशान ब्रह्म से संबंधित होता है I और यहाँ पर कई और बिंदुओं पर भी बात होगी जैसे शब्द महाभूत, तन्मात्र, महाभूत सिद्धि, तन्मात्र सिद्धि, आकाश ब्रह्म, शब्द ब्रह्म, आकाश सिद्ध शरीर, ब्रह्माण्डातीत सिद्धि, ब्रह्म आयुर्वेद, ब्रह्माण्ड आयुर्वेद, चिकित्सा बुद्ध, ब्रह्माण्डीय आयुर्वेद, ...

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ईशान ब्रह्म, सदाशिव का ईशान मुख, साक्षी, परब्रह्म, परमात्मा, स्व:प्रकाश, परमशिव, ब्रह्म, निर्गुण ब्रह्म, निर्गुण निराकार ब्रह्म, आत्मा, माँ गायत्री का मुक्ता मुख, निर्गुण लिंग, नासदीय सूक्त का जल शब्द

इस अध्याय में पञ्चब्रह्म में से मध्य ब्रह्म, जो ईशान ब्रह्म कहलाते हैं, और जिनको सदाशिव का ईशान मुख (और शिव का ईशान मुख) भी कहा जाता है, उनपर बात होगी I ईशान नामक ब्रह्म ऊपर (या आकाश या गंतव्य) …

ईशान ब्रह्म, सदाशिव का ईशान मुख, साक्षी, परब्रह्म, परमात्मा, स्व:प्रकाश, परमशिव, ब्रह्म, निर्गुण ब्रह्म, निर्गुण निराकार ब्रह्म, आत्मा, माँ गायत्री का मुक्ता मुख, निर्गुण लिंग, नासदीय सूक्त का जल शब्द

इस अध्याय में पञ्चब्रह्म में से मध्य ब्रह्म, जो ईशान ब्रह्म कहलाते हैं, और जिनको सदाशिव का ईशान मुख (और शिव का ईशान मुख) भी कहा जाता है, उनपर बात होगी I ईशान नामक ब्रह्म ऊपर (या आकाश या गंतव्य) की ओर देखते हैं और इनका महाभूत भी आकाश महाभूत ...

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मुक्ति के प्रभेद, मोक्ष के प्रकार, कैवल्य, केवल, कैवल्य मोक्ष, मुक्तात्मा, विदेहमुक्ति, जीवनमुक्ति, सद्योमुक्ति, तीर्थंकर, कर्ममुक्ति, कर्मातीत मुक्ति, कर्माधीन मुक्ति, योग और अयोग, अत्यन्तिक प्रलय, आनंदकृष्ण, ज्ञानकृष्ण, आत्मकृष्ण, कालकृष्ण

यह अध्याय पूर्व के अध्याय जिसका नाम ईशान ब्रह्म था, उसका ही अंग है I और यह अध्याय माँ गायत्री के मुक्ता मुख को ही दर्शाता है I यहाँ पर मुक्ति के प्रकार, मोक्ष के प्रभेद, मुक्ति, मोक्ष, मुक्ति के …

मुक्ति के प्रभेद, मोक्ष के प्रकार, कैवल्य, केवल, कैवल्य मोक्ष, मुक्तात्मा, विदेहमुक्ति, जीवनमुक्ति, सद्योमुक्ति, तीर्थंकर, कर्ममुक्ति, कर्मातीत मुक्ति, कर्माधीन मुक्ति, योग और अयोग, अत्यन्तिक प्रलय, आनंदकृष्ण, ज्ञानकृष्ण, आत्मकृष्ण, कालकृष्ण

यह अध्याय पूर्व के अध्याय जिसका नाम ईशान ब्रह्म था, उसका ही अंग है I और यह अध्याय माँ गायत्री के मुक्ता मुख को ही दर्शाता है I यहाँ पर मुक्ति के प्रकार, मोक्ष के प्रभेद, मुक्ति, मोक्ष, मुक्ति के प्रभेद, मोक्ष के प्रकार, कैवल्य, केवल, कैवल्य मोक्ष, कैवल्य मुक्ति, ...

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तुरीयातीत, सर्वातीत, कालातीत, गुणातीत, भूतातीत, तन्मात्रातीत, दिशातीत, दशातीत, कालात्मा, गुणात्मा, भूतात्मा, चेतन चतुष्टय, जाग्रत सुषुप्ति स्वप्न तुरीय, अवधूत, कालमुक्त, गुणमुक्त, भूतमुक्त, मार्गमुक्त

यह अध्याय भी ईशान नामक ब्रह्म का ही अभिन्न अंग है I यहाँ पर कई बिंदुओं पर बात होगी, जैसे तुरीयातीत, सर्वातीत, कालातीत, कालात्मा, गुणातीत, गुणात्मा, भूतातीत, भूतात्मा, तन्मात्रातीत, तन्मात्रात्मा, दिशातीत, मार्गातीत, दिशात्मा, दशातीत, लोकातीत, लोकात्मा, दशात्मा, चेतन चतुष्टय, चेतना …

तुरीयातीत, सर्वातीत, कालातीत, गुणातीत, भूतातीत, तन्मात्रातीत, दिशातीत, दशातीत, कालात्मा, गुणात्मा, भूतात्मा, चेतन चतुष्टय, जाग्रत सुषुप्ति स्वप्न तुरीय, अवधूत, कालमुक्त, गुणमुक्त, भूतमुक्त, मार्गमुक्त

यह अध्याय भी ईशान नामक ब्रह्म का ही अभिन्न अंग है I यहाँ पर कई बिंदुओं पर बात होगी, जैसे तुरीयातीत, सर्वातीत, कालातीत, कालात्मा, गुणातीत, गुणात्मा, भूतातीत, भूतात्मा, तन्मात्रातीत, तन्मात्रात्मा, दिशातीत, मार्गातीत, दिशात्मा, दशातीत, लोकातीत, लोकात्मा, दशात्मा, चेतन चतुष्टय, चेतना चतुष्टय, जाग्रत सुषुप्ति स्वप्न तुरीय, अवधूत, कालमुक्ति, कालमुक्त, गुणमुक्ति, गुणमुक्त, ...

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पञ्चब्रह्म गायत्री प्रदक्षिणा, पञ्चब्रह्म प्रदक्षिणा, गायत्री परिक्रमा, पञ्च ब्रह्मोपनिषद परिक्रमा, पञ्च मुखी गायत्री, पञ्च मुखा गायत्री, गायत्री सरस्वती, गायत्री विद्या, गायत्री विद्या सरस्वती, गायत्री सरस्वती विद्या

इस अध्याय में पञ्चब्रह्म गायत्री प्रदक्षिणा को बताया जाएगा, जो साधक योगमार्ग से संपन्न करता है, क्यूंकि इसका कोई और मार्ग है ही नहीं I जो साधक सद्योजात से परकाया प्रवेश प्रक्रिया के द्वारा शरीरी रूप में लौटाया गया था, …

पञ्चब्रह्म गायत्री प्रदक्षिणा, पञ्चब्रह्म प्रदक्षिणा, गायत्री परिक्रमा, पञ्च ब्रह्मोपनिषद परिक्रमा, पञ्च मुखी गायत्री, पञ्च मुखा गायत्री, गायत्री सरस्वती, गायत्री विद्या, गायत्री विद्या सरस्वती, गायत्री सरस्वती विद्या

इस अध्याय में पञ्चब्रह्म गायत्री प्रदक्षिणा को बताया जाएगा, जो साधक योगमार्ग से संपन्न करता है, क्यूंकि इसका कोई और मार्ग है ही नहीं I जो साधक सद्योजात से परकाया प्रवेश प्रक्रिया के द्वारा शरीरी रूप में लौटाया गया था, उसकी चेतना अघोर, वामदेव, तत्पुरुष और सद्योजात का साक्षात्कार इसी ...

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पञ्चब्रह्म गायत्री सिद्धांत, गायत्री ब्रह्म सिद्धांत, जीवधर, जगतधर, मूलास्त्र चतुष्टय, जीव ही जगत, जगत ही जीव, जीवातीत, जगतातीत, मनात्मा, ज्ञानात्मा, चिदात्मा, अहमात्मा, प्राणात्मा, सिद्धांतातीत, तंत्रातीत

यहाँ पञ्चब्रह्म गायत्री सिद्धांत पर बात होगी I इसमें साधक पञ्चब्रह्म गायत्री प्रदक्षिणा मार्ग पर जाकर कई सिद्धियों को पाता है, जो प्रमुखतः तीन प्रकार की होती है I एक जो जीव शब्द से संबंध रखती है, और दूसरी जो …

पञ्चब्रह्म गायत्री सिद्धांत, गायत्री ब्रह्म सिद्धांत, जीवधर, जगतधर, मूलास्त्र चतुष्टय, जीव ही जगत, जगत ही जीव, जीवातीत, जगतातीत, मनात्मा, ज्ञानात्मा, चिदात्मा, अहमात्मा, प्राणात्मा, सिद्धांतातीत, तंत्रातीत

यहाँ पञ्चब्रह्म गायत्री सिद्धांत पर बात होगी I इसमें साधक पञ्चब्रह्म गायत्री प्रदक्षिणा मार्ग पर जाकर कई सिद्धियों को पाता है, जो प्रमुखतः तीन प्रकार की होती है I एक जो जीव शब्द से संबंध रखती है, और दूसरी जो जगत शब्द से सम्बंधित होती है और तीसरी जो इन ...

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पञ्च कोष, पञ्च कोष विज्ञान, अन्नमय कोष, पञ्च महाभूत, अन्न के प्रकार, अन्न के प्रभेद, अन्न ब्रह्म, रचना का मार्ग ब्रह्म, रचना ब्रह्म, रचैता ब्रह्म, अनुग्रह सिद्धि, कृपा सिद्धि, अनुग्रह सिद्ध, कृपा सिद्ध

यहाँ पर पञ्च कोष विज्ञान पर बात होगी I यहाँ पर पाँच कोष और पञ्च महाभूत, अन्न के प्रकार, अन्न के प्रभेद, अन्न ब्रह्म ही है, इसपर भी बात होगी I यहाँ पर रचना का मार्ग ब्रह्म, रचना ब्रह्म, रचैता …

पञ्च कोष, पञ्च कोष विज्ञान, अन्नमय कोष, पञ्च महाभूत, अन्न के प्रकार, अन्न के प्रभेद, अन्न ब्रह्म, रचना का मार्ग ब्रह्म, रचना ब्रह्म, रचैता ब्रह्म, अनुग्रह सिद्धि, कृपा सिद्धि, अनुग्रह सिद्ध, कृपा सिद्ध

यहाँ पर पञ्च कोष विज्ञान पर बात होगी I यहाँ पर पाँच कोष और पञ्च महाभूत, अन्न के प्रकार, अन्न के प्रभेद, अन्न ब्रह्म ही है, इसपर भी बात होगी I यहाँ पर रचना का मार्ग ब्रह्म, रचना ब्रह्म, रचैता ब्रह्म, अनुग्रह सिद्धि, कृपा सिद्धि, अनुग्रह सिद्ध, कृपा सिद्ध, इन ...

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प्राणमय कोश, प्राण, उपप्राण, लघुप्राण, पञ्चवायु, पञ्चप्राण, प्राणाकाश, प्राण ब्रह्म, एकादशाकाश, रुद्राकाश, एकादश रुद्र, ग्यारह रुद्र, एकोहं बहुस्याम:, हृदय प्राणमय कोश, ब्रह्मरंध्र प्राणमय कोश, अंतःकरण प्राणमय कोष, प्राण शक्ति, आत्मशक्ति

यहाँ पर प्राणमय कोश के पञ्चप्राण (पञ्च प्राण, पञ्चवायु) और पञ्च उपप्राण (या पञ्च लघुप्राण या पञ्च लघुवायु) पर बात होगी I यही प्राण शक्ति है I यह पञ्च प्राण और पञ्च लघुप्राण भी पञ्चब्रह्म गायत्री सिद्धांत के अंतर्गत ही …

प्राणमय कोश, प्राण, उपप्राण, लघुप्राण, पञ्चवायु, पञ्चप्राण, प्राणाकाश, प्राण ब्रह्म, एकादशाकाश, रुद्राकाश, एकादश रुद्र, ग्यारह रुद्र, एकोहं बहुस्याम:, हृदय प्राणमय कोश, ब्रह्मरंध्र प्राणमय कोश, अंतःकरण प्राणमय कोष, प्राण शक्ति, आत्मशक्ति

यहाँ पर प्राणमय कोश के पञ्चप्राण (पञ्च प्राण, पञ्चवायु) और पञ्च उपप्राण (या पञ्च लघुप्राण या पञ्च लघुवायु) पर बात होगी I यही प्राण शक्ति है I यह पञ्च प्राण और पञ्च लघुप्राण भी पञ्चब्रह्म गायत्री सिद्धांत के अंतर्गत ही हैं I प्राणमय कोश का नाता उस प्राणाकाश से भी ...

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मनोमय कोश, मन ब्रह्म, मनस शक्ति, इच्छा शक्ति, मनाकाश, मनातीत, भाव में साधन, भूमि भूमा भूधर भूमत्व, विज्ञानमय कोश, जीवात्मा, ज्ञान ब्रह्म, ज्ञान शक्ति, बुद्धता कोश, बुद्धत्व कोश, ज्ञानाकाश, महाकारण देह

यहाँ पर मनोमय कोश, मन ब्रह्म, मनस शक्ति, इच्छा शक्ति, मनाकाश और भाव में साधन पर बात होगी I और इस अध्याय में विज्ञानमय कोश, जीवात्मा, ज्ञान ब्रह्म, ज्ञान शक्ति, बुद्धता कोश, बुद्धत्व कोश, ज्ञानाकाश और महाकारण देह पर भी …

मनोमय कोश, मन ब्रह्म, मनस शक्ति, इच्छा शक्ति, मनाकाश, मनातीत, भाव में साधन, भूमि भूमा भूधर भूमत्व, विज्ञानमय कोश, जीवात्मा, ज्ञान ब्रह्म, ज्ञान शक्ति, बुद्धता कोश, बुद्धत्व कोश, ज्ञानाकाश, महाकारण देह

यहाँ पर मनोमय कोश, मन ब्रह्म, मनस शक्ति, इच्छा शक्ति, मनाकाश और भाव में साधन पर बात होगी I और इस अध्याय में विज्ञानमय कोश, जीवात्मा, ज्ञान ब्रह्म, ज्ञान शक्ति, बुद्धता कोश, बुद्धत्व कोश, ज्ञानाकाश और महाकारण देह पर भी बात होगी I इस अध्याय में बताए गए साक्षात्कार का ...

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अंतःकरण चतुष्टय, चार अंतःकरण, अंतःकरण के चार भाग, अंतःकरण, आनंदमय कोश, मन बुद्धि चित्त अहम्, चेतन ब्रह्म, अहम् ब्रह्म, गुण ब्रह्म, सर्वसम ब्रह्म, कारण कोश, कारण शरीर, मन बुद्धि चित्त अहंकार

यहाँ कारण कोश, कारण शरीर, आनंदमय कोश, अंतःकरण चतुष्टय विज्ञान, चार अंतःकरण (अंतःकरण के चार भाग), अर्थात मन बुद्धि चित्त अहंकार, पर बात होगी I इसके अतिरिक्त यहाँ कर चेतन ब्रह्म, अहम् ब्रह्म, गुण ब्रह्म, सर्वसम ब्रह्म, पर भी कुछ …

अंतःकरण चतुष्टय, चार अंतःकरण, अंतःकरण के चार भाग, अंतःकरण, आनंदमय कोश, मन बुद्धि चित्त अहम्, चेतन ब्रह्म, अहम् ब्रह्म, गुण ब्रह्म, सर्वसम ब्रह्म, कारण कोश, कारण शरीर, मन बुद्धि चित्त अहंकार

यहाँ कारण कोश, कारण शरीर, आनंदमय कोश, अंतःकरण चतुष्टय विज्ञान, चार अंतःकरण (अंतःकरण के चार भाग), अर्थात मन बुद्धि चित्त अहंकार, पर बात होगी I इसके अतिरिक्त यहाँ कर चेतन ब्रह्म, अहम् ब्रह्म, गुण ब्रह्म, सर्वसम ब्रह्म, पर भी कुछ स्पष्ट और कुछ सांकेतिक ही बात होगी I वैसे अबतक ...

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योगभ्रष्ट, प्रबुद्ध योगभ्रष्ट, योग भ्रष्ट, प्रबुद्ध योग भ्रष्ट

इस अध्याय में, उस योग भ्रष्ट को बतलाऊँगा, जो प्रबुद्ध भी होता है, अर्थात, इस अध्याय में उस योगभ्रष्ट की बात होगी, जो प्रबुद्ध योगभ्रष्ट है। इस अध्याय से मैं आत्मपथ या ब्रह्मपथ या ब्रह्मत्व पथ श्रृंखला को प्रारम्भ कर …

योगभ्रष्ट, प्रबुद्ध योगभ्रष्ट, योग भ्रष्ट, प्रबुद्ध योग भ्रष्ट

इस अध्याय में, उस योग भ्रष्ट को बतलाऊँगा, जो प्रबुद्ध भी होता है, अर्थात, इस अध्याय में उस योगभ्रष्ट की बात होगी, जो प्रबुद्ध योगभ्रष्ट है। इस अध्याय से मैं आत्मपथ या ब्रह्मपथ या ब्रह्मत्व पथ श्रृंखला को प्रारम्भ कर रहा हूँ।  इस श्रृंखला में कई सारे अध्याय होंगे। ये ...

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ब्रह्म ग्रंथ, प्रजापति ग्रंथ, आत्म ग्रन्थ, महानतम ग्रन्थ, महत्तम ग्रन्थ

इस भाग में मैं शरीर के ग्रंथ स्वरूप का वर्णन करूंगा। वास्तव में मानव शरीर ही ब्रह्म ग्रंथ या ब्रह्मग्रंथ, प्रजापति ग्रंथ या आत्म ग्रन्थ होता है। इस मानव शरीर से उत्तम कोई और ग्रंथ भी नहीं होता, जिसके कारण …

ब्रह्म ग्रंथ, प्रजापति ग्रंथ, आत्म ग्रन्थ, महानतम ग्रन्थ, महत्तम ग्रन्थ

इस भाग में मैं शरीर के ग्रंथ स्वरूप का वर्णन करूंगा। वास्तव में मानव शरीर ही ब्रह्म ग्रंथ या ब्रह्मग्रंथ, प्रजापति ग्रंथ या आत्म ग्रन्थ होता है। इस मानव शरीर से उत्तम कोई और ग्रंथ भी नहीं होता, जिसके कारण मानव शरीर को महानतम ग्रंथ, महत्तम ग्रंथ भी कहा जा ...

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मक्केश्वर महादेव, मक्का महादेव, मक्का के देवता, नमः शिवाय

इस भाग में, मक्का के शिव, मक्केश्वर महादेव, मक्का महादेव, मक्का के महादेव, मक्का के देवता हैं, के बारे में बताउंगा, जो मक्का शरीफ के देवता हैं, जो पञ्चमुखा सदाशिव के दक्षिण दिशा को देखने वाले गाढ़े नीले वर्ण के …

मक्केश्वर महादेव, मक्का महादेव, मक्का के देवता, नमः शिवाय

इस भाग में, मक्का के शिव, मक्केश्वर महादेव, मक्का महादेव, मक्का के महादेव, मक्का के देवता हैं, के बारे में बताउंगा, जो मक्का शरीफ के देवता हैं, जो पञ्चमुखा सदाशिव के दक्षिण दिशा को देखने वाले गाढ़े नीले वर्ण के अघोर मुख से सम्बंधित हैं, जिसका वेद यजुर्वेद है, जिनका ...

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योग कृत्य और ब्रह्म राक्षस

अब योग कृत्य और ब्रह्म राक्षस के बारे में बतलाता हूँ … इस मार्ग को आत्ममार्ग, ब्रह्ममार्ग, कैवल्यमार्ग, ब्रह्मपथ और मुक्तिमार्ग भी कह सकते हैं, जो साधक के भीतर से ही प्रशस्त होता हुआ, स्वज्ञान या स्वयं के ज्ञान की …

योग कृत्य और ब्रह्म राक्षस

अब योग कृत्य और ब्रह्म राक्षस के बारे में बतलाता हूँ … इस मार्ग को आत्ममार्ग, ब्रह्ममार्ग, कैवल्यमार्ग, ब्रह्मपथ और मुक्तिमार्ग भी कह सकते हैं, जो साधक के भीतर से ही प्रशस्त होता हुआ, स्वज्ञान या स्वयं के ज्ञान की ओर लेकर जाता है। ये अध्याय भी आत्मपथ, ब्रह्मपथ या ...

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आत्मसाधना, आत्मा ही आत्मा में, ब्रह्मसाधना, ब्रह्म ही ब्रह्म में

ये चित्र हृदय के सूक्ष्म तत्त्वों में बसी हुई एक ऐसी गुफा का है, जो उस मार्ग को दर्शाती है, जिसको मैं स्वयं ही स्वयं में, ऐसा कहता हूं। इस चित्र के मार्ग को, रुद्र ही रुद्र में, ब्रह्म ही …

आत्मसाधना, आत्मा ही आत्मा में, ब्रह्मसाधना, ब्रह्म ही ब्रह्म में

ये चित्र हृदय के सूक्ष्म तत्त्वों में बसी हुई एक ऐसी गुफा का है, जो उस मार्ग को दर्शाती है, जिसको मैं स्वयं ही स्वयं में, ऐसा कहता हूं। इस चित्र के मार्ग को, रुद्र ही रुद्र में, ब्रह्म ही ब्रह्म में, आत्मा ही आत्मा में, ऐसा भी कहा जा ...

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ईमाहो और ब्रह्माणी विद्या

अब मैं ईमाहो शब्द को बताउंगा। ये शब्द का ज्ञान आज विकृत स्वरूप में बताया जाता है इसलिए ये प्रयास उस ज्ञान को विशुद्ध करने का है। इस साक्षात्कार के मूल में, ब्रह्माणी विद्या, अर्थात ब्रह्माणी देवी या ब्रह्माणी सरस्वती …

ईमाहो और ब्रह्माणी विद्या

अब मैं ईमाहो शब्द को बताउंगा। ये शब्द का ज्ञान आज विकृत स्वरूप में बताया जाता है इसलिए ये प्रयास उस ज्ञान को विशुद्ध करने का है। इस साक्षात्कार के मूल में, ब्रह्माणी विद्या, अर्थात ब्रह्माणी देवी या ब्रह्माणी सरस्वती ही हैं। ये अध्याय भी आत्मपथ, ब्रह्मपथ या ब्रह्मत्व पथ ...

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पञ्च विद्या, पञ्च सरस्वती, देवी भारती, देवी शारदा, देवी गायत्री, देवी सावित्री, देवी ब्रह्माणी, पञ्च विद्या सरस्वती, पञ्च सरस्वती विद्या, भारत शब्द की परिभाषा

अब मैं संक्षेप में, पञ्च विद्या को बताता हूँ, जिनको पञ्च सरस्वती भी कहा जाता है। दस महाविद्या साधना से पूर्व, पञ्च विद्या या पञ्च सरस्वती साधना होती हैं। पञ्च विद्या सरस्वती या पञ्च सरस्वती विद्या में पाँच देवी होती …

पञ्च विद्या, पञ्च सरस्वती, देवी भारती, देवी शारदा, देवी गायत्री, देवी सावित्री, देवी ब्रह्माणी, पञ्च विद्या सरस्वती, पञ्च सरस्वती विद्या, भारत शब्द की परिभाषा

अब मैं संक्षेप में, पञ्च विद्या को बताता हूँ, जिनको पञ्च सरस्वती भी कहा जाता है। दस महाविद्या साधना से पूर्व, पञ्च विद्या या पञ्च सरस्वती साधना होती हैं। पञ्च विद्या सरस्वती या पञ्च सरस्वती विद्या में पाँच देवी होती हैं, जिनको देवी भारती, देवी शारदा, देवी गायत्री, देवी सावित्री ...

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जीवत्व सिद्धि, जगतत्व सिद्धि, ब्रह्माण्ड धारणा, जीव जगत एकापन, ब्रह्माण्ड योग

यहाँ जीवत्व सिद्धि, जगतत्व सिद्धि, ब्रह्माण्ड धारणा, जीव जगत एकापन और ब्रह्माण्ड योग पर बात होगीI ये अध्याय भी आत्मपथ, ब्रह्मपथ या ब्रह्मत्व पथ श्रृंखला का अंग है, जो पूर्व के अध्याय से चली आ रही है। ये भाग मैं …

जीवत्व सिद्धि, जगतत्व सिद्धि, ब्रह्माण्ड धारणा, जीव जगत एकापन, ब्रह्माण्ड योग

यहाँ जीवत्व सिद्धि, जगतत्व सिद्धि, ब्रह्माण्ड धारणा, जीव जगत एकापन और ब्रह्माण्ड योग पर बात होगीI ये अध्याय भी आत्मपथ, ब्रह्मपथ या ब्रह्मत्व पथ श्रृंखला का अंग है, जो पूर्व के अध्याय से चली आ रही है। ये भाग मैं अपनी गुरु परंपरा, जो इस पूरे ब्रह्मकल्प में, आम्नाय सिद्धांत ...

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अथातो ब्रह्म जिज्ञासा और ब्रह्म भावापन, अथातो ब्रह्मजिज्ञासा

अब मैं इस भीतर की यात्रा में, जिसको मैंने “स्वयं ही स्वयं में”, ऐसा कहा है, उसके एक प्रमुख बिंदु, अथातो ब्रह्म जिज्ञासा (अथातो ब्रह्मजिज्ञासा), जो ब्रह्म भावापन अवस्था को दर्शाता है…, उसे बतलाता हूँ। ये अध्याय भी आत्मपथ, ब्रह्मपथ …

अथातो ब्रह्म जिज्ञासा और ब्रह्म भावापन, अथातो ब्रह्मजिज्ञासा

अब मैं इस भीतर की यात्रा में, जिसको मैंने “स्वयं ही स्वयं में”, ऐसा कहा है, उसके एक प्रमुख बिंदु, अथातो ब्रह्म जिज्ञासा (अथातो ब्रह्मजिज्ञासा), जो ब्रह्म भावापन अवस्था को दर्शाता है…, उसे बतलाता हूँ। ये अध्याय भी आत्मपथ, ब्रह्मपथ या ब्रह्मत्व पथ श्रृंखला का अंग है, जो पूर्व के ...

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