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सूर्य देव, सूर्य, सिंदूरी लाल शरीर, सूर्य शरीर, तैजस शरीर, सूर्य लोक, तैजस लोक, सूर्य देवता, सूर्य लोक के जीव, सूर्य सिद्धि, सूर्य लोक में लय, सूर्य देवता का स्वरूप, गुरु शिष्य परंपरा की महिमा, गुरुदक्षिणा का अखण्ड सनातन स्वरूप

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अव्यक्त प्रकृति, अव्यक्त प्राण, माया शक्ति, महामाया, शारदा सरस्वती, शारदा विद्या, शारदा विद्या सरस्वती, शारदा सरस्वती विद्या, गुलाबी शरीर, माया सिद्ध शरीर, महामाया सिद्ध शरीर, काम लोक, कामसूत्र, माया सिद्धि, महामाया सिद्धि, अव्यक्त सिद्धि, अव्यक्त शरीर, गुलाबी लक्ष्मी, महामाया लोक, माया लोक, शारदा सिद्धि, शारदा सिद्ध शरीर, शारदा ही ब्रह्म, तुसित लोक

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ब्रह्मलोक, सत्य लोक, विशुद्ध सत्, सद्योजात सदाशिव, सदाशिव का सद्योजात मुख, वज्र लोक, इक्कीस शून्य, चतुर्मुखा ब्रह्मा, प्रजापति, ब्रह्मा सरस्वती, परा प्रकृति, अदि शक्ति, नवम आकाश, वज्रमणि शरीर, वज्र शरीर, सनतकुमार ब्रह्मा, बाका ब्रह्मा, सहमपति ब्रह्मा, महाब्रह्मा, पुरुषार्थ चतुष्टय, चार बुद्ध, सर्वसम स्वरूप स्थिति, पुरुषार्थातीत, आश्रमातीत

यहाँ पर ब्रह्मलोक, सतलोक, सत्य लोक, विशुद्ध सत्, सद्योजात सदाशिव, सदाशिव का सद्योजात मुख, वज्र लोक, इक्कीस  शून्य, चतुर्मुखा ब्रह्मा, प्रजापति, ब्रह्मा सरस्वती, परा प्रकृति, अदि शक्ति, नवम आकाश, वज्रमणि शरीर, वज्र शरीर, सनतकुमार ब्रह्मा, बाका ब्रह्मा, सहमपति ब्रह्मा, सोऽहंपति …

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बोधिचित्त, निर्वाण, आपो ज्योति, बुद्धि और चित्त का योग, बोधमय चित्त, चित्तमय बोध, योग सुमेरु, योग मेरु, योग शिखर, मेरु योग, मेरु पर्वत, सुमेरु पर्वत, मेरु शिखर, अंतर्लक्ष्य, नित्य वैकुंठ, सत्य कैलाश, चिन्मय नेत्र, आत्मस्थिति, त्रिगुणातीत, सर्वसाक्षी, अंतरसाक्ष्य, अंतरसाक्षी, वृतिहीन दशा

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भगवान हरिहर, महामृत्युञ्जय मंत्र, नाभि लिंग, परा प्रकृति लिंग, आदिशक्ति लिंग, शिखर लिंग, हरिहर लिंग, विष्णु ही शिव, शिव ही विष्णु, हरि ही हर, हर ही हरि, लिंग का अर्थ, शिवत्व ही विष्णुत्व, विष्णुत्व ही शिवत्व

यहां पर भगवान हरिहर, महामृत्युञ्जय मंत्र, नाभि लिंग, परा प्रकृति लिंग, आदिशक्ति लिंग, शिखर लिंग, हरिहर लिंग, विष्णु ही शिव, शिव ही विष्णु, हरि ही हर, हर ही हरि, लिंग का अर्थ, शिवत्व ही विष्णुत्व, विष्णुत्व ही शिवत्व आदि बिंदुओं …

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भगवान् राम, राम नाद, शिव तारक मंत्र, राम का शब्द, योग मार्ग के राम, शिव का तारक मंत्र, यौगिक राम, योग काशी, योगमार्ग की काशी, योग मार्ग का प्रयागराज, योग प्रयागराज, रकार मार्ग, मोक्ष नाद, मोक्ष का शब्द, सहस्रार चक्र की परिभाषा

यहाँ पर राम नाद, शिव तारक मंत्र, राम का शब्द, भगवान् राम, योग मार्ग के राम, शिव का तारक मंत्र, यौगिक राम, योग काशी,  योगमार्ग की काशी, योग मार्ग का प्रयागराज, योग प्रयागराज, रकार मार्ग, मोक्ष नाद, मोक्ष का शब्द, …

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शिव शक्ति योग, शक्ति शिव योग, शिव ही शक्ति है, शक्ति ही शिव है, पुरुष प्रकृति योग, प्रकृति पुरुष योग, भद्र भद्री योग, भद्री भद्र योग, समंतभद्र समंतभद्री योग, मनोमय कोष प्राणमय कोष योग, रामयान, तारकयान

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विष्णुत्व, अर्द्धनारी, अर्द्धनारीश्वर, अर्धनारी, अर्धनारीश्वर, सगुण आत्मा, विष्णु स्वरूप, अर्द्धनारी योग, अर्द्धनारीश्वर योग, श्री विष्णु, नैन कमल में अर्द्धनारी, सहस्रार में अर्द्धनारी, अर्द्धनारी शरीर, अर्द्धनारीश्वर शरीर, गौरीशंकर, उमा महेश्वर, उमाशंकर

अब तक शरीर में शिव शक्ति योग को बताया गया था I इस अध्याय में इसी शक्ति शिव योग को नैन कमल और सहस्रार में बताया जाएगा I इस अध्याय में साधक की काया के भीतर बसे हुए गुरुदेव, जो …

विष्णुत्व, अर्द्धनारी, अर्द्धनारीश्वर, अर्धनारी, अर्धनारीश्वर, सगुण आत्मा, विष्णु स्वरूप, अर्द्धनारी योग, अर्द्धनारीश्वर योग, श्री विष्णु, नैन कमल में अर्द्धनारी, सहस्रार में अर्द्धनारी, अर्द्धनारी शरीर, अर्द्धनारीश्वर शरीर, गौरीशंकर, उमा महेश्वर, उमाशंकर

अब तक शरीर में शिव शक्ति योग को बताया गया था I इस अध्याय में इसी शक्ति शिव योग को नैन कमल और सहस्रार में बताया जाएगा I इस अध्याय में साधक की काया के भीतर बसे हुए गुरुदेव, जो शक्ति और शिव की योगदशा को दर्शाते हैं, और जो ...

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योग अश्वमेध, आंतरिक अश्वमेध, वज्रदण्ड, निरालम्बस्थान, निरालम्ब चक्र, ब्रह्म चक्र, निराधार चक्र, निराधारस्थान, अष्टम चक्र, वज्रदण्ड चक्र, त्रिशंकु, अष्टवसु सिद्धि, द्वादश आदित्य सिद्धि, एकादश रुद्र सिद्धि, इंद्र सिद्धि, प्रजापति सिद्धि

यहाँ पर योग अश्वमेध, आंतरिक अश्वमेध, वज्रदण्ड, निरालम्बस्थान, निरालम्ब चक्र, ब्रह्म चक्र, निराधार चक्र, निराधारस्थान, अष्टम चक्र, वज्रदण्ड चक्र, त्रिशंकु, अष्टवसु सिद्धि, द्वादश आदित्य सिद्धि, एकादश रुद्र सिद्धि, इंद्र सिद्धि, प्रजापति सिद्धि आदि बिंदुओं पर बात होगी I यहाँ बताया …

योग अश्वमेध, आंतरिक अश्वमेध, वज्रदण्ड, निरालम्बस्थान, निरालम्ब चक्र, ब्रह्म चक्र, निराधार चक्र, निराधारस्थान, अष्टम चक्र, वज्रदण्ड चक्र, त्रिशंकु, अष्टवसु सिद्धि, द्वादश आदित्य सिद्धि, एकादश रुद्र सिद्धि, इंद्र सिद्धि, प्रजापति सिद्धि

यहाँ पर योग अश्वमेध, आंतरिक अश्वमेध, वज्रदण्ड, निरालम्बस्थान, निरालम्ब चक्र, ब्रह्म चक्र, निराधार चक्र, निराधारस्थान, अष्टम चक्र, वज्रदण्ड चक्र, त्रिशंकु, अष्टवसु सिद्धि, द्वादश आदित्य सिद्धि, एकादश रुद्र सिद्धि, इंद्र सिद्धि, प्रजापति सिद्धि आदि बिंदुओं पर बात होगी I यहाँ बताया गया साक्षात्कार, 2011 ईस्वी के प्रारंभ की बात है, जब ...

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अथर्ववेद 10.2.31, हिरण्यगर्भ ब्रह्माणी योग, बुद्धत्व, बुद्धता, बुद्ध, ब्रह्माणी सरस्वती, ब्रह्माणी विद्या, ब्रह्माणी विद्या सरस्वती, रामलला, आत्मा राम, खकार, डकार, हिरण्यगर्भ ब्रह्माणी शरीर, हिरण्यगर्भ शरीर, ब्रह्माणी शरीर, स्वर्णिम आत्मा, हिरण्यमय आत्मा, मस्तिष्क में ब्रह्म, ब्रह्मरंध्र में ब्रह्म, सहस्रार में ब्रह्म

यहाँ पर अथर्ववेद 10.2.31, हिरण्यगर्भ ब्रह्माणी योग, बुद्धत्व, बुद्धता, बुद्ध, ब्रह्माणी सरस्वती, ब्रह्माणी विद्या, ब्रह्माणी विद्या सरस्वती, रामलला, आत्मा राम, खकार, डकार, हिरण्यगर्भ ब्रह्माणी शरीर, हिरण्यगर्भ शरीर, ब्रह्माणी शरीर, स्वर्णिम आत्मा, हिरण्यमय आत्मा, मस्तिष्क में ब्रह्म, ब्रह्मरंध्र में ब्रह्म, सहस्रार …

अथर्ववेद 10.2.31, हिरण्यगर्भ ब्रह्माणी योग, बुद्धत्व, बुद्धता, बुद्ध, ब्रह्माणी सरस्वती, ब्रह्माणी विद्या, ब्रह्माणी विद्या सरस्वती, रामलला, आत्मा राम, खकार, डकार, हिरण्यगर्भ ब्रह्माणी शरीर, हिरण्यगर्भ शरीर, ब्रह्माणी शरीर, स्वर्णिम आत्मा, हिरण्यमय आत्मा, मस्तिष्क में ब्रह्म, ब्रह्मरंध्र में ब्रह्म, सहस्रार में ब्रह्म

यहाँ पर अथर्ववेद 10.2.31, हिरण्यगर्भ ब्रह्माणी योग, बुद्धत्व, बुद्धता, बुद्ध, ब्रह्माणी सरस्वती, ब्रह्माणी विद्या, ब्रह्माणी विद्या सरस्वती, रामलला, आत्मा राम, खकार, डकार, हिरण्यगर्भ ब्रह्माणी शरीर, हिरण्यगर्भ शरीर, ब्रह्माणी शरीर, स्वर्णिम आत्मा, हिरण्यमय आत्मा, मस्तिष्क में ब्रह्म, ब्रह्मरंध्र में ब्रह्म, सहस्रार में ब्रह्म, अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या आदि बिंदुओं पर बात ...

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वासुकी नाग, श्श्श नाद, नागराज, नाग सम्राट, शिव के कण्ठ् का नाग, सर्पराज, योग वासुकी, योग आदिशेष, शिव पंचाक्षर मंत्र, शिव षडक्षर मंत्र, शिव अष्टाक्षर मंत्र, ॐ नमः शिवाय, शिव षडक्षर स्तोत्रम्, क्षीर सागर, अत्यन्तिकाप्रलय, ब्रह्माण्ड प्रदक्षिणा, ब्रह्माण्ड परिक्रमा

यहाँ पर वासुकी नाग, श्श्श नाद, नागराज, नाग सम्राट, शिव के कण्ठ् का नाग, सर्पराज, योग वासुकी, योग आदिशेष, शिव पंचाक्षर मंत्र, शिव षडक्षर मंत्र, शिव अष्टाक्षर मंत्र, ॐ नमः शिवाय, शिव षडक्षर स्तोत्रम्, क्षीर सागर, अत्यन्तिकाप्रलय, ब्रह्माण्ड प्रदक्षिणा, ब्रह्माण्ड …

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मंदिर कलश, गरुड, खड्ग, त्रिशूल, विष्णु लिंग, ब्रह्मदण्ड, त्रिदण्ड, धर्मदण्ड, देवदण्ड, नंदका, रत्न मारू, सुमेरु, खण्डा, उडुम्बरा, चक्रधर, पुष्पक विमान, महासिद्ध, देवदत्त अश्व, माथे का सर्प, विराट कृष्ण, वज्रास्त्र, भारत की सौ नदीयाँ, सौ बुद्ध, फ़रवहर, मूषक, मयूर, हंस, तैंतीस कोटि देवता

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यहाँ पर मंदिर कलश, गरुड, वज्र, खड्ग, त्रिशूल, विष्णु लिंग, ब्रह्मदण्ड, त्रिदण्ड, धर्मदण्ड, देवदण्ड, नंदका, रत्न मारू, सुमेरु, खण्डा, उडुम्बरा पुष्प, चक्रधर, पुष्पक विमान, महासिद्ध, देवदत्त अश्व, माथे का सर्प, विराट कृष्ण, वज्रास्त्र, भारत की सौ नदीयाँ, सौ बुद्ध, सौ बीजाक्षर मंत्र, फ़रवहर, मूषक, मयूर, हंस आदि बिंदुओं पर बात ...

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समाधि, शून्य, शून्य ब्रह्म, शून्यता, शून्य अनंत, अनंत शून्य, मूल प्रकृति, बिंदु शून्य, जड़ समाधि, ब्रह्माण्डीय ऊर्जा, महातम्, महातमस, शून्य समाधि, असंप्रज्ञात समाधि, निर्बीज समाधि, महाशून्य, निर्विकल्प समाधि, निर्विकल्प ब्रह्म, निर्बीज ब्रह्म, संप्रज्ञात समाधि

यहाँ पर समाधि, शून्य, शून्य ब्रह्म, शून्यता, शून्य अनंत, अनंत शून्य, मूल प्रकृति, बिंदु शून्य, जड़ समाधि, ब्रह्माण्डीय ऊर्जा, महातम् योद्धा, शून्य समाधि, असंप्रज्ञात समाधि, निर्बीज समाधि, महाशून्य, निर्विकल्प समाधि, निर्विकल्प ब्रह्म, निर्बीज ब्रह्म, संप्रज्ञात समाधि आदि बिंदुओं पर बात …

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हिरण्यगर्भात्मक लिंग चतुष्टय, चतुर्लिंगात्मक हिरण्यगर्भ, हिरण्यगर्भात्मक चतुर्लिंग, तारक लिंग, खखोल्क लिंग, महाकालेश्वर, हृदय लिंग, आकाश लिंग, कुण्डलिनी लिंग, मूल लिंग, आधार लिंग, पाताल लिंग, शंख, गदा, कमल, अरुण स्तम्भ, गरुड़ स्तम्भ, खखोलक मंत्र, शब्द ब्रह्म, लघु ब्रह्मास्त्र, निर्वाणधातु

यहाँ पर हिरण्यगर्भात्मक लिंग चतुष्टय, हिरण्यगर्भ ब्रह्म का चतुर्लिंग स्वरूप, चतुर्लिंगात्मक हिरण्यगर्भ, तारक लिंग, खखोल्क लिंग, महाकालेश्वर, महाकाल, हृदय लिंग, आकाश लिंग, कुण्डलिनी लिंग, मूल लिंग, आधार लिंग, पाताल लिंग, शंख, गदा, कमल, अरुण स्तम्भ, गरुड़ स्तम्भ, खखोलक मंत्र, शब्द …

हिरण्यगर्भात्मक लिंग चतुष्टय, चतुर्लिंगात्मक हिरण्यगर्भ, हिरण्यगर्भात्मक चतुर्लिंग, तारक लिंग, खखोल्क लिंग, महाकालेश्वर, हृदय लिंग, आकाश लिंग, कुण्डलिनी लिंग, मूल लिंग, आधार लिंग, पाताल लिंग, शंख, गदा, कमल, अरुण स्तम्भ, गरुड़ स्तम्भ, खखोलक मंत्र, शब्द ब्रह्म, लघु ब्रह्मास्त्र, निर्वाणधातु

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ॐ क्या है, ॐ के भाग, ॐ ब्रह्म है, ॐ महामंत्र है, ॐ साक्षात्कार, ब्रह्म का लिपिलिंग, ब्रह्म का शब्द्लिंग

अब मैं ॐ शृंखला का प्रारम्भ कर रहा हूँ। यहाँ पर ॐ या ओम् या ओउम् को विस्तारपूर्वक बतलाया जायेगा।  इस श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य है की साधकगण जाने… ॐ क्या है, ॐ की महिमा, ॐ किसे कहते हैं, ॐ …

ॐ क्या है, ॐ के भाग, ॐ ब्रह्म है, ॐ महामंत्र है, ॐ साक्षात्कार, ब्रह्म का लिपिलिंग, ब्रह्म का शब्द्लिंग

अब मैं ॐ शृंखला का प्रारम्भ कर रहा हूँ। यहाँ पर ॐ या ओम् या ओउम् को विस्तारपूर्वक बतलाया जायेगा।  इस श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य है की साधकगण जाने… ॐ क्या है, ॐ की महिमा, ॐ किसे कहते हैं, ॐ का स्वरूप, ॐ और ब्रह्म का नाता, ॐ और देवी ...

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अकार, सावित्री सरस्वती, ॐ का प्रथम बीज, माँ सावित्री सरस्वती विद्या, सावित्री विद्या सरस्वती, बुद्ध प्रज्ञापारमिता, विराट, विश्व, अग्नि

यहाँ मैं अकार, जो ॐ का प्रथम बीज शब्द अ है, उस अ शब्द को थोड़ा विसपतारपूर्वक बतलाऊँगा। पञ्च विद्या या पञ्च सरस्वती में, ॐ का यही प्रथम बीज शब्द जो अकार है, वो ही सावित्री विद्या हैं, जिनको सावित्री …

अकार, सावित्री सरस्वती, ॐ का प्रथम बीज, माँ सावित्री सरस्वती विद्या, सावित्री विद्या सरस्वती, बुद्ध प्रज्ञापारमिता, विराट, विश्व, अग्नि

यहाँ मैं अकार, जो ॐ का प्रथम बीज शब्द अ है, उस अ शब्द को थोड़ा विसपतारपूर्वक बतलाऊँगा। पञ्च विद्या या पञ्च सरस्वती में, ॐ का यही प्रथम बीज शब्द जो अकार है, वो ही सावित्री विद्या हैं, जिनको सावित्री सरस्वती या माँ सावित्री भी कहा जाता है। बौद्ध मार्ग ...

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परकाया प्रवेश और माँ सावित्री विद्या, परकाया प्रवेश प्रक्रिया, निःसंभोग जन्म, कुंवारी जन्म, अजन्मा जन्म, मदर मैरी

यहाँ परकाया प्रवेश को बतलाऊँगा, जिसको निसंभोग जन्म और कुंवारी जन्म भी कहा जा सकता है। इस अध्याय में परकाया प्रवेश और माँ सावित्री, या कुँवारी जन्म और सावित्री विद्या का नाता भी बतलाया जाएगा। इस अध्याय में परकाया प्रवेश …

परकाया प्रवेश और माँ सावित्री विद्या, परकाया प्रवेश प्रक्रिया, निःसंभोग जन्म, कुंवारी जन्म, अजन्मा जन्म, मदर मैरी

यहाँ परकाया प्रवेश को बतलाऊँगा, जिसको निसंभोग जन्म और कुंवारी जन्म भी कहा जा सकता है। इस अध्याय में परकाया प्रवेश और माँ सावित्री, या कुँवारी जन्म और सावित्री विद्या का नाता भी बतलाया जाएगा। इस अध्याय में परकाया प्रवेश प्रक्रिया, अर्थात निःसंभोग जन्म प्रक्रिया या कुंवारी जन्म प्रक्रिया को ...

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उकार, ओकार, ओ३म् का दूसरा बीज, कार्य ब्रह्म, कार्यब्रह्म, सृष्टिकर्ता, सदाशिव का तत्पुरुष मुख, महेश्वर, योगेश्वर, योगीराज, योगसम्राट, योग गुरु, योगर्षि, सगुण ब्रह्म, रचनाकर्ता, धर्मकाया, अमिताभ बुद्ध, अहुरा मज़्दा, तैजस, वायु

इस अध्याय में उकार या ओकार पर बात होगी, जो ओ३म का दूसरा बीज है, और जो उन हिरण्यगर्भ ब्रह्म का कार्य ब्रह्म स्वरूप है, और जो इस जीव जगत के वास्तविक रचैता हैं, अर्थात इस जीव जगत के सृष्टिकर्ता, …

उकार, ओकार, ओ३म् का दूसरा बीज, कार्य ब्रह्म, कार्यब्रह्म, सृष्टिकर्ता, सदाशिव का तत्पुरुष मुख, महेश्वर, योगेश्वर, योगीराज, योगसम्राट, योग गुरु, योगर्षि, सगुण ब्रह्म, रचनाकर्ता, धर्मकाया, अमिताभ बुद्ध, अहुरा मज़्दा, तैजस, वायु

इस अध्याय में उकार या ओकार पर बात होगी, जो ओ३म का दूसरा बीज है, और जो उन हिरण्यगर्भ ब्रह्म का कार्य ब्रह्म स्वरूप है, और जो इस जीव जगत के वास्तविक रचैता हैं, अर्थात इस जीव जगत के सृष्टिकर्ता, रचनाकर्ता भी हैं I पञ्च मुखी सदाशिव में यही उकार, ...

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ब्रह्मर्षि, ब्रह्मऋषि और पञ्च विद्या सरस्वती, ओम द्रष्टा, ॐ द्रष्टा, वेदद्रष्टा, मंत्र द्रष्टा, मन्त्रार्थ स्थित, वेदार्थ स्थित, ओमार्थ स्थित, मनु और मंत्र

इस अध्याय में ब्रह्मर्षि (या ब्रह्मऋषि) शब्द को और ब्रह्म ऋषि की अवस्था को बतलाया जाएगा I इस अध्याय में मनु और मंत्र को भी बतलाया जाएगा I इस ग्रन्थ में यह अध्याय इसलिए लाना पड़ गया क्यूंकि आज के …

ब्रह्मर्षि, ब्रह्मऋषि और पञ्च विद्या सरस्वती, ओम द्रष्टा, ॐ द्रष्टा, वेदद्रष्टा, मंत्र द्रष्टा, मन्त्रार्थ स्थित, वेदार्थ स्थित, ओमार्थ स्थित, मनु और मंत्र

इस अध्याय में ब्रह्मर्षि (या ब्रह्मऋषि) शब्द को और ब्रह्म ऋषि की अवस्था को बतलाया जाएगा I इस अध्याय में मनु और मंत्र को भी बतलाया जाएगा I इस ग्रन्थ में यह अध्याय इसलिए लाना पड़ गया क्यूंकि आज के समय पर इस शब्द का अर्थ या तो किसी में ...

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सावित्री हिरण्यगर्भ प्रदक्षिणा, सावित्री कार्य ब्रह्म प्रदक्षिणा, सावित्री प्रदक्षिणा, हिरण्यगर्भ प्रदक्षिणा, कार्य ब्रह्म प्रदक्षिणा, अकार उकार प्रदक्षिणा, आर्य प्रदक्षिणा

इस अध्याय में सावित्री परिक्रमा (या अकार परिक्रमा) और हिरण्यगर्भ परिक्रमा (या उकार परिक्रमा) पर बात होगी I जब हिरण्यगर्भ प्रदक्षिणा या कार्य ब्रह्म प्रदक्षिणा, अर्थात उकार प्रदक्षिणा होती है, तब सावित्री प्रदक्षिणा, अर्थात अकार प्रदक्षिणा भी स्वतः हो जाती …

सावित्री हिरण्यगर्भ प्रदक्षिणा, सावित्री कार्य ब्रह्म प्रदक्षिणा, सावित्री प्रदक्षिणा, हिरण्यगर्भ प्रदक्षिणा, कार्य ब्रह्म प्रदक्षिणा, अकार उकार प्रदक्षिणा, आर्य प्रदक्षिणा

इस अध्याय में सावित्री परिक्रमा (या अकार परिक्रमा) और हिरण्यगर्भ परिक्रमा (या उकार परिक्रमा) पर बात होगी I जब हिरण्यगर्भ प्रदक्षिणा या कार्य ब्रह्म प्रदक्षिणा, अर्थात उकार प्रदक्षिणा होती है, तब सावित्री प्रदक्षिणा, अर्थात अकार प्रदक्षिणा भी स्वतः हो जाती है I इसलिए इस प्रदक्षिणा (या परिक्रमा) को सावित्री हिरण्यगर्भ ...

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मकार और माँ सावित्री, ओ३म् का तीसरा बीज, त्रिदेव, त्रिदेवी, हरिहरब्रह्मा, शुद्ध चेतन तत्त्व, ब्रह्मतत्त्व, ॐ तत् सत्, ईश्वर, आदित्य, प्राज्ञ, सगुण शिव, ब्रह्मनाद, प्रणव, भ्रामरी

यहाँ पर मकार पर बात होगी, जिसका शब्द म है, इसलिए इसको म शब्द (म शब्द) भी कहा जा सकता है I मकार ही त्रिदेव, ईश्वर, आदित्य (सूर्य) और प्राज्ञ को दर्शाता है I मकार का साक्षात्कार लिंगात्मक स्वरूप में …

मकार और माँ सावित्री, ओ३म् का तीसरा बीज, त्रिदेव, त्रिदेवी, हरिहरब्रह्मा, शुद्ध चेतन तत्त्व, ब्रह्मतत्त्व, ॐ तत् सत्, ईश्वर, आदित्य, प्राज्ञ, सगुण शिव, ब्रह्मनाद, प्रणव, भ्रामरी

यहाँ पर मकार पर बात होगी, जिसका शब्द म है, इसलिए इसको म शब्द (म शब्द) भी कहा जा सकता है I मकार ही त्रिदेव, ईश्वर, आदित्य (सूर्य) और प्राज्ञ को दर्शाता है I मकार का साक्षात्कार लिंगात्मक स्वरूप में ही होता है, जो त्रिलिंग या त्रिदेव लिंग स्वरूप में ...

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ॐ, ओम् और माँ सावित्री सरस्वती, ओउम् और त्रिबीज, ओंकार, ओमकार, ब्रह्म एकाक्षर, ॐ प्रदक्षिणा और ब्रह्म अनक्षर, ॐ और निर्विकल्प समाधि, ॐ और निर्गुण ब्रह्म

यहाँ पर ॐ, जिसे ओम्, ओउम्, ओंकार, और ओमकार भी कहा जाता है, उसकी बात होगी I इस अध्याय का साक्षात्कार तब होता है, जब साधक की चेतना पूर्व में बतलाए गए अकार, उकार (या ओकार), मकार, शुद्ध चेतन तत्त्व …

ॐ, ओम् और माँ सावित्री सरस्वती, ओउम् और त्रिबीज, ओंकार, ओमकार, ब्रह्म एकाक्षर, ॐ प्रदक्षिणा और ब्रह्म अनक्षर, ॐ और निर्विकल्प समाधि, ॐ और निर्गुण ब्रह्म

यहाँ पर ॐ, जिसे ओम्, ओउम्, ओंकार, और ओमकार भी कहा जाता है, उसकी बात होगी I इस अध्याय का साक्षात्कार तब होता है, जब साधक की चेतना पूर्व में बतलाए गए अकार, उकार (या ओकार), मकार, शुद्ध चेतन तत्त्व (ब्रह्मतत्त्व) का साक्षात्कार करके, इन सबसे परे चली जाती है ...

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प्रज्ञापारमिता मंत्र, सावित्री मार्ग और ॐ पथ, प्रज्ञापारमितासूत्र, हृदय प्रज्ञापारमिता सूत्र, जीवात्मा का लय

यहाँ पर सावित्री मार्ग और ॐ पथ की समानता की बात होगी I यह अध्याय बुद्ध प्रज्ञापारमिता मंत्र पर साधक की उत्कर्ष गति को भी दर्शाता है I इस अध्याय में, हृदय प्रज्ञापारमितासूत्र पर बात होगी, जिसको मेरे इससे पूर्वजन्म …

प्रज्ञापारमिता मंत्र, सावित्री मार्ग और ॐ पथ, प्रज्ञापारमितासूत्र, हृदय प्रज्ञापारमिता सूत्र, जीवात्मा का लय

यहाँ पर सावित्री मार्ग और ॐ पथ की समानता की बात होगी I यह अध्याय बुद्ध प्रज्ञापारमिता मंत्र पर साधक की उत्कर्ष गति को भी दर्शाता है I इस अध्याय में, हृदय प्रज्ञापारमितासूत्र पर बात होगी, जिसको मेरे इससे पूर्वजन्म के गुरुदेव, गौतम बुद्ध ने बताया था I वेदों की ...

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हृदय में ब्रह्म, कैवल्य मार्ग, कैवल्य पथ, हृदय कैवल्य गुफा, गुहा कैवल्य, परा और अव्यक्त प्रकृति का योग, हृदय में माँ शारदा, आत्मदिव्यता, सरस्वती शारदा ही ब्रह्म, ब्रह्मरूपिणी गुरुमाई शारदा, ब्रह्मसूत्र चतुर्थ अध्याय

यहाँ हृदय कैवल्य गुफा या हृदय की कैवल्य गुफा का वर्णन होगा । यहाँ बताए गए मार्ग को कैवल्य पथ या कैवल्य मार्ग भी कहा जा सकता है। यह कैवल्य गुफा या गुहा कैवल्य, हृदय की सबसे अन्दर की गुफा …

हृदय में ब्रह्म, कैवल्य मार्ग, कैवल्य पथ, हृदय कैवल्य गुफा, गुहा कैवल्य, परा और अव्यक्त प्रकृति का योग, हृदय में माँ शारदा, आत्मदिव्यता, सरस्वती शारदा ही ब्रह्म, ब्रह्मरूपिणी गुरुमाई शारदा, ब्रह्मसूत्र चतुर्थ अध्याय

यहाँ हृदय कैवल्य गुफा या हृदय की कैवल्य गुफा का वर्णन होगा । यहाँ बताए गए मार्ग को कैवल्य पथ या कैवल्य मार्ग भी कहा जा सकता है। यह कैवल्य गुफा या गुहा कैवल्य, हृदय की सबसे अन्दर की गुफा है, जिसको योगी हृदय की अन्य सभी गुफ़ाओं को पार ...

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घटाकाश, आकाश और मोक्ष, … मोक्ष गुफा, मोक्ष पथ, मोक्ष मार्ग, गुहा मोक्ष

यहाँ हृदय की मोक्ष गुफा के दूसरे बिंदु, जो घटाकाश, घट का आकाश और साधक के शरीर के भीतर का आकाश भी कहलाता है, उस का वर्णन होगा । यहाँ बताए गए मार्ग को मोक्ष पथ या मोक्ष मार्ग भी …

घटाकाश, आकाश और मोक्ष, … मोक्ष गुफा, मोक्ष पथ, मोक्ष मार्ग, गुहा मोक्ष

यहाँ हृदय की मोक्ष गुफा के दूसरे बिंदु, जो घटाकाश, घट का आकाश और साधक के शरीर के भीतर का आकाश भी कहलाता है, उस का वर्णन होगा । यहाँ बताए गए मार्ग को मोक्ष पथ या मोक्ष मार्ग भी कहा जा सकता है। ये गुहा मोक्ष, हृदय की सबसे ...

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निर्वाण मार्ग, निर्वाण पथ, हृदय निर्वाण गुफा, गुहा निर्वाण, अहमाकाश, ब्रह्माण्ड का लिंगात्मक स्वरूप

यहाँ हृदय निर्वाण गुफा या हृदय की निर्वाण गुफा के तीसरे बिंदु, जो अहंकार, साधक का अहम् भाव और साधक का अहंकार भी कहलाता है, उसका वर्णन होगा । यहाँ बताए गए मार्ग को निर्वाण पथ या निर्वाण मार्ग भी …

निर्वाण मार्ग, निर्वाण पथ, हृदय निर्वाण गुफा, गुहा निर्वाण, अहमाकाश, ब्रह्माण्ड का लिंगात्मक स्वरूप

यहाँ हृदय निर्वाण गुफा या हृदय की निर्वाण गुफा के तीसरे बिंदु, जो अहंकार, साधक का अहम् भाव और साधक का अहंकार भी कहलाता है, उसका वर्णन होगा । यहाँ बताए गए मार्ग को निर्वाण पथ या निर्वाण मार्ग भी कहा जा सकता है । ये निर्वाण गुफा या गुहा ...

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